रांची। भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रांची की टीम ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। इस बार एसीबी के निशाने पर बुढ़मू अंचल कार्यालय था, जहां जमीन के म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) के नाम पर चल रहे बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ है। एसीबी ने सुनियोजित तरीके से जाल बिछाकर सबसे पहले 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए एक आरोपी को रंगेहाथ दबोचा। इसके बाद जब कड़ियां जोड़ी गईं और जांच की आंच आगे बढ़ी, तो भ्रष्टाचार में संलिप्त पाए गए भू-राजस्व कर्मचारी और अंचल अधिकारी (सीओ) को भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिया गया। इस बड़ी कार्रवाई से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है।
पूरा मामला मांडर थाना क्षेत्र के ग्राम ब्रांबे निवासी सुबोध कुमार की शिकायत से जुड़ा है। सुबोध कुमार ने एसीबी रांची में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी कि मौजा सासम (प्रखंड बुढ़मू) स्थित उनकी 3 एकड़ 20 डिसमिल जमीन की रजिस्ट्री उनकी पत्नी पिंकी देवी, साली जया कुमारी और संगीता गुप्ता के नाम से हो चुकी है। इसके बाद उन्होंने म्यूटेशन के लिए अंचल कार्यालय में आवेदन और रजिस्ट्री की प्रति जमा की थी। काम होने के बजाय, फाइल को लंबे समय तक दबाकर रखा गया। परेशान होकर जब शिकायतकर्ता म्यूटेशन की प्रगति जानने बुढ़मू अंचल कार्यालय पहुंचे, तो अंचलाधिकारी ने उन्हें सीधे तौर पर भू-राजस्व कर्मचारी राजेश कुमार से मिलने का निर्देश दिया। शिकायतकर्ता के अनुसार, जब वे राजस्व उप-निरीक्षक राजेश कुमार से मिले, तो उसने पहले म्यूटेशन की प्रक्रिया को बेहद जटिल बताया और फिर सीधे शब्दों में कहा कि काम कराने के लिए 80 से 90 हजार रुपये का खर्च आएगा। काफी मिन्नतें करने के बाद राजस्व कर्मचारी कम राशि पर काम करने को तैयार हुआ। सुबोध कुमार ने इस संबंध में दोबारा अंचलाधिकारी से मुलाकात की और गुहार लगाई, लेकिन सीओ ने भी मामले को गंभीरता से न लेते हुए दोबारा राजेश कुमार से ही बात करने को कह दिया। इसी बीच, राजस्व कर्मचारी राजेश कुमार ने सेटिंग को अंजाम देने के लिए अपने भाई गौतम कुमार को आगे कर दिया। गौतम कुमार ने सुबोध से डील पक्की करते हुए कहा, "फिलहाल पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये दे दीजिए। इसके बाद म्यूटेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी जाएगी और बाकी के पैसे मिलते ही काम पूरा हो जाएगा। शिकायतकर्ता घूस देकर अपना जायज काम नहीं कराना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सीधे भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो का दरवाजा खटखटाया। एसीबी की टीम ने मामले की संजीदगी को देखते हुए पहले गुप्त रूप से शिकायत का भौतिक सत्यापन कराया। सत्यापन में 10 हजार रुपये रिश्वत मांगने का आरोप पूरी तरह सही पाया गया। इसके बाद 7 जुलाई 2026 को एसीबी की एक विशेष टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही शिकायतकर्ता ने अंचल कार्यालय के पास पहली किस्त के रूप में ₹10,000 की राशि गौतम किशोर रवि (राजस्व कर्मचारी का भाई) को थमाई, वैसे ही घात लगाए बैठी एसीबी की टीम ने उसे रंगेहाथ दबोच लिया। केमिकल टेस्ट में आरोपी के हाथ गुलाबी हो गए। गौतम किशोर रवि की गिरफ्तारी के बाद एसीबी की टीम ने मौके पर ही गहन जांच और पूछताछ शुरू की। सत्यापन रिपोर्ट और मौके से मिले पुख्ता साक्ष्यों ने साफ कर दिया कि इस भ्रष्टाचार की चेन ऊपर तक जुड़ी हुई थी। बिना समय गंवाए एसीबी की टीम ने मामले के मुख्य सूत्रधार राजेश किशोर रवि (राजस्व उप-निरीक्षक/भू-राजस्व कर्मचारी, बुढ़मू अंचल) और भ्रष्टाचार को शह देने वाले अंचल अधिकारी सच्चिदानंद कुमार वर्मा को भी गिरफ्तार कर लिया।