Oct 09, 2026
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देवभूमि के 'बाल वैज्ञानिकों' को सीएम धामी का ₹1 करोड़ का तोहफा: सीमांत क्षेत्रों से निकलेगी विकसित भारत 2047 की बुलंद तस्वीर

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उत्तराखंड के सीमांत जनपदों के दूरदराज इलाकों में छिपी बाल प्रतिभाओं की वैज्ञानिक सोच को अब नए पंख मिलने जा रहे हैं। शुक्रवार को बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित विवेकानंद इंटर कॉलेज परिसर उस समय अभूतपूर्व उत्साह का गवाह बना, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा आयोजित ‘पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव’ का भव्य शुभारंभ किया।

पहाड़ों की प्रतिभा को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में नई उड़ान देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी पहल की है। मंडलसेरा स्थित विवेकानंद इंटर कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित पंचम सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री ने शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए एक करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक-एक ‘लैब ऑन व्हील्स’ स्थापित करने, विज्ञान प्रयोगशालाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जोड़ने और विद्यालयों में रोबोटिक्स व ड्रोन तकनीक को प्रोत्साहित करने की बात कही। उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (यूकॉस्ट) की ओर से आयोजित इस महोत्सव में प्रदेश के छह सीमांत पर्वतीय जनपदों—चमोली, चंपावत, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़ के 240 चयनित बाल वैज्ञानिक हिस्सा ले रहे हैं। महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच, प्रयोग करने की प्रवृत्ति और नए विचारों को विकसित करने की भावना को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज के बाल वैज्ञानिक ही वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन से प्रेरणा लेने की सलाह दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को लगातार सवाल पूछने चाहिए, नई चीजों को समझने का प्रयास करना चाहिए और अपने विचारों को प्रयोगों के माध्यम से आगे बढ़ाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने महोत्सव में बाल वैज्ञानिकों से सीधे संवाद भी किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों की जिज्ञासाएं सुनीं और उनके सवालों के जवाब दिए। बच्चों के साथ इस संवाद का उद्देश्य उनमें आत्मविश्वास बढ़ाने और विज्ञान के प्रति रुचि को प्रोत्साहित करने से जुड़ा रहा। विज्ञान शिक्षा को विद्यालयों तक सीमित रखने के बजाय विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रयोगों से जोड़ने पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश के प्रत्येक विकासखंड में एक-एक ‘लैब ऑन व्हील्स’ स्थापित करने की घोषणा की। इससे विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों और प्रयोगों से परिचित कराने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है। उन्होंने राज्य की स्टेम प्रयोगशालाओं को एआई से जोड़ने तथा विद्यालयों में रोबोटिक्स और ड्रोन तकनीक को बढ़ावा देने की भी बात कही। इसके अलावा प्रदेश के सभी जिलों में विज्ञान एवं नवाचार केंद्र स्थापित करने और महिला विकास तथा विज्ञान विषय पर सम्मेलन आयोजित करने की घोषणा भी की। इन पहलों के माध्यम से विद्यार्थियों को बदलती तकनीक से परिचित कराने, वैज्ञानिक प्रयोगों के प्रति रुचि बढ़ाने और भविष्य की तकनीकी जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करने पर जोर दिया गया। महोत्सव के दौरान विज्ञान शिक्षा के क्षेत्र में सराहनीय कार्य करने वाले पांच शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में कविता हरकोटिया, दीप चंद्र जोशी, हरिमोहन ऐठानी, संगम साह और ख्याली दत्त शामिल रहे। शिक्षकों के योगदान को विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना गया। कार्यक्रम में बागेश्वर विधायक पार्वती दास, कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया, दायित्वधारी शिव सिंह बिष्ट और भूपेश उपाध्याय, जिला पंचायत अध्यक्ष शोभा आर्या, भाजपा प्रदेश महामंत्री कुंदन सिंह परिहार, यूकॉस्ट के महानिदेशक प्रो. दुर्गेश पंत, जिलाधिकारी अपूर्वा पांडेय, पुलिस अधीक्षक जितेंद्र मेहरा, मुख्य विकास अधिकारी नरेश कुमार और विद्यालय के प्रधानाचार्य अव्वल सिंह तोपाल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री की घोषणाओं से प्रदेश में विज्ञान शिक्षा, तकनीकी प्रशिक्षण और नवाचार को बढ़ावा देने की दिशा में नई संभावनाएं खुलने की उम्मीद है। हालांकि, इन पहलों का वास्तविक लाभ विद्यार्थियों तक पहुंचाने के लिए प्रयोगशालाओं की स्थापना, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता और प्रशिक्षित शिक्षकों की व्यवस्था अहम होगी। पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चों को यदि शुरुआती स्तर से ही विज्ञान और तकनीक के व्यावहारिक अवसर मिलते हैं, तो उनकी प्रतिभा को आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच मिल सकता है।