Jul 11, 2026

सीएम हेमंत सोरेन ने स्थानीय बौद्धिक संपदा को बढ़ाने के लिए वैश्विक नवाचार और शैक्षणिक संस्थानों का स्वागत किया

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रांची। झारखंड को केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान से आगे ले जाकर ज्ञान, नवाचार और तकनीकी विकास का केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। नई दिल्ली के एक निजी होटल में आयोजित दो दिवसीय नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन-2026 के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के विकास का नया विजन पेश करते हुए कहा कि झारखंड अब 'माइन्स टू माइंड्स' (खदानों से ज्ञान की ओर) की यात्रा पर आगे बढ़ेगा। इस दौरान उद्योग, सूचना प्रौद्योगिकी और पर्यटन क्षेत्रों में 99 हजार करोड़ रुपये से अधिक के 14 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जिन्हें राज्य के आर्थिक भविष्य की नई नींव माना जा रहा है। समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड के विकास का अगला चरण केवल प्राकृतिक संसाधनों पर आधारित नहीं होगा, बल्कि ज्ञान, रिसर्च, इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और मानव संसाधन को विकास का आधार बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य की बौद्धिक क्षमता को बढ़ाने के लिए नवाचार एवं शोध संस्थानों का स्वागत किया जाएगा और दीर्घकालिक योजनाओं के जरिए झारखंड को देश का प्रमुख रिसर्च एवं इनोवेशन हब बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कंसल्टेशन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निवेशकों, तकनीकी विशेषज्ञों, पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों और विकास साझेदारों ने भाग लेकर झारखंड के भविष्य पर व्यापक चर्चा की। इसका सबसे बड़ा परिणाम 14 एमओयू के रूप में सामने आया। इनमें 10 समझौते उद्योग विभाग, दो सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और दो पर्यटन विभाग की ओर से किए गए। इन समझौतों में मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), पर्यटन, इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक तकनीक जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग शामिल है। कार्यक्रम के दौरान जिंदल ग्रुप, वरुण बेवरेजेस, टाटा समूह, गूगल, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील, पावर न्यूक्लियर समेत कई राष्ट्रीय और वैश्विक संस्थानों के साथ समझौते हुए। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये केवल कागजी एमओयू नहीं हैं, बल्कि झारखंड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को तय समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारा जाए और केवल घोषणाओं तक सीमित न रखा जाए। हेमंत सोरेन ने कहा कि राज्य सरकार अल्पकालिक योजनाओं के बजाय दीर्घकालिक साझेदारी (लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप) पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड की आदिवासी विरासत, प्राकृतिक संसाधन और युवा आबादी राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं। विकास का लाभ समाज के हर वर्ग, विशेषकर आदिवासी समुदायों तक पहुंचना चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने जियाडा के नियमों में आदिवासी समूहों को दी जाने वाली 25 प्रतिशत रियायत को बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने की संभावनाओं पर विचार करने का निर्देश भी अधिकारियों को दिया।

मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया कि अतीत में बेहतर संवाद और प्रभावी प्रस्तुति के अभाव में झारखंड की क्षमताएं देश-दुनिया के सामने पूरी तरह नहीं आ सकीं। अब सरकार निवेशकों के साथ लगातार संवाद बनाए रखते हुए राज्य की संभावनाओं को राष्ट्रीय और वैश्विक मंचों पर मजबूती से प्रस्तुत करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता ऐसी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था तैयार करना है, जो नवाचार, जिम्मेदार निवेश और सतत विकास पर आधारित हो। बैठक में पर्यटन क्षेत्र को भी विशेष प्राथमिकता दी गई। पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य सरकार पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर झारखंड की अर्थव्यवस्था को केवल खनन पर निर्भर नहीं रहने देना चाहती। उन्होंने बताया कि नेशनल स्टेकहोल्डर्स कंसल्टेशन का उद्देश्य नीति निर्माण से पहले उद्योग और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों की राय लेकर व्यवहारिक और प्रभावी नीतियां तैयार करना है।पर्यटन मंत्री ने कहा कि झारखंड आने वाला एक पर्यटक औसतन तीन दिन के प्रवास के दौरान लगभग 18 हजार रुपये खर्च करता है। यह राशि सीधे स्थानीय अर्थव्यवस्था में जाती है और होटल, टैक्सी, रेस्तरां, हस्तशिल्प, छोटे व्यापारियों तथा स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देती है। उन्होंने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में निवेश से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार इस दिशा में नीति आयोग के साथ भी लगातार चर्चा कर रही है। कंसल्टेशन में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी सरकार की पहल का स्वागत किया, लेकिन भूमि आवंटन और कारोबार में आसानी (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) से जुड़ी चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित किया। उद्योगपति आर.के. गर्ग ने सुझाव दिया कि झारखंड को गुजरात जैसे राज्यों के सफल औद्योगिक मॉडल का अध्ययन करना चाहिए और सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि भूमि आवंटन और प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी तो निवेश तेजी से बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने समापन सत्र में निवेशकों, उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञों और विकास साझेदारों का आभार व्यक्त करते हुए उन्हें झारखंड की विकास यात्रा का सहभागी बनने का आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य ऐसी आधुनिक और वैश्विक प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था का निर्माण करना है, जहां निवेश के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को भी समान अवसर मिलें। अब सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता इन निवेश समझौतों को समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतारना है, ताकि झारखंड वास्तव में 'माइन्स टू माइंड्स' की सोच को साकार करते हुए देश के अग्रणी विकासशील राज्यों की श्रेणी में अपनी मजबूत पहचान बना सके।