Apr 14, 2026

सरकारी अस्पताल में बाहर की दवा लिखी तो खैर नहीं, स्वास्थ्य मंत्री की डॉक्टरों को दो टूक चेतावनी

post-img

देहरादून। उत्तराखंड की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाने और सरकारी अस्पतालों के प्रति जनता का भरोसा जगाने के लिए धामी सरकार ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। सोमवार को दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने डॉक्टरों और प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने साफ कहा कि सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवाओं की उपलब्धता के बावजूद जो डॉक्टर मरीजों को बाहर की दवा लिखेंगे, उन्हें चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

अस्पताल में विभिन्न नई सुविधाओं का लोकार्पण करने के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने डॉक्टरों और प्रोफेसरों के साथ अहम बैठक की। मंत्री ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि योग्य डॉक्टर और मुफ्त सुविधाओं के बावजूद लोग निजी अस्पतालों की ओर क्यों भाग रहे हैं? उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा, "सरकारी अस्पताल में घुसते ही अहसास हो जाता है कि यह सरकारी है। हमें इस 'परसेप्शन' को बदलना होगा।" उन्होंने साफ-सफाई और पार्किंग जैसी बुनियादी व्यवस्थाओं को आउटसोर्सिंग के माध्यम से जल्द से जल्द दुरुस्त करने के निर्देश दिए। मंत्री सुबोध उनियाल ने डॉक्टरों को उनके पेशे की पवित्रता याद दिलाते हुए कहा कि सरकारी डॉक्टर कठिन प्रतिस्पर्धा से निकलकर यहाँ पहुँचे हैं, फिर भी लोग रिजेक्टेड डॉक्टरों के निजी क्लीनिकों में भीड़ लगा रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि दून अस्पताल को एक मॉडल के रूप में विकसित किया जाए जहाँ गरीब आदमी को एक रुपए की दवा भी बाहर से न खरीदनी पड़े। जो डॉक्टर इसमें लापरवाही बरतेंगे, उनकी सूची तैयार की जाएगी। पहाड़ी और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार अब 'रोस्टर पोस्टिंग' की तैयारी कर रही है। इसके तहत दून जैसे बड़े अस्पतालों के विशेषज्ञ डॉक्टरों को 6-6 महीने के लिए अन्य क्षेत्रों में भेजा जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक अल्ट्रासाउंड की सुविधा पहुंचाई जाएगी। प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट की भारी कमी को देखते हुए मंत्री ने निर्देश दिए कि वर्तमान रेडियोलॉजी प्रोफेसरों के माध्यम से अन्य डॉक्टरों को बैच बनाकर ट्रेनिंग दी जाए। यदि आवश्यकता पड़ी, तो निजी मेडिकल कॉलेजों के विशेषज्ञों की मदद लेकर इस कमी को दूर किया जाएगा ताकि दूरदराज के मरीजों को शहर न भागना पड़े।