नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने के लिए सोना खरीदने से परहेज करने, विदेश यात्राएं स्थगित करने और पेट्रोल-डीजल का विवेकपूर्ण उपयोग करने की अपील ने देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। प्रधानमंत्री की इस अपील को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इसे सरकार की नाकामी का प्रमाण बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझौतावादी करार दिया और कहा कि अब वे देश चलाने में सक्षम नहीं रह गए हैं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सलाह नहीं बल्कि विफलता की स्वीकारोक्ति है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जनता से कहा है कि वे सोना न खरीदें, विदेश यात्रा न करें, पेट्रोल का कम इस्तेमाल करें, उर्वरक और खाना पकाने के तेल की खपत घटाएं, मेट्रो का इस्तेमाल करें और जरूरत पड़ने पर घर से काम करें। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि आखिर 12 वर्षों के शासन के बाद देश ऐसी स्थिति में क्यों पहुंच गया है कि सरकार को जनता से यह कहना पड़ रहा है कि वे क्या खरीदें और क्या न खरीदें, कहां जाएं और कहां न जाएं।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री बार-बार अपनी जवाबदेही से बचने के लिए जिम्मेदारी जनता पर डाल देते हैं। उन्होंने कहा कि जब भी संकट आता है तो सरकार समाधान प्रस्तुत करने के बजाय लोगों से त्याग और संयम की अपील करने लगती है। राहुल ने कहा कि यह देश को नेतृत्व देने की क्षमता की कमी को दर्शाता है और यह साबित करता है कि सरकार वैश्विक संकटों से निपटने की ठोस रणनीति बनाने में असफल रही है। कांग्रेस पार्टी ने भी प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस ने कहा कि अमेरिका-ईरान युद्ध को तीन महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकार अब तक भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर ठोस कदम उठाने में विफल रही है। पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार पश्चिम एशिया संकट के प्रभावों का आकलन करने और उससे निपटने की रणनीति बनाने में पूरी तरह नाकाम रही है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जनता को असुविधा में धकेलना और उनसे निजी खर्च कम करने की अपील करना बेशर्मी, गैरजिम्मेदारी और नैतिक विफलता का उदाहरण है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि सरकार को विदेशी मुद्रा संकट और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव की आशंका थी तो उसने समय रहते वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों, रणनीतिक तेल भंडार और व्यापारिक समझौतों को मजबूत करने के लिए क्या कदम उठाए।
कांग्रेस का कहना है कि वैश्विक संकट के दौर में सरकार का दायित्व होता है कि वह जनता को राहत दे, न कि उन्हें अपनी जीवनशैली बदलने की नसीहत देकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ ले। दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को हैदराबाद में तेलंगाना भाजपा द्वारा आयोजित एक रैली को संबोधित करते हुए देशवासियों से विदेशी मुद्रा बचाने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाने की अपील की थी। उन्होंने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण पेट्रोलियम उत्पादों और उर्वरकों की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी का जिक्र करते हुए कहा कि देश को हर हाल में विदेशी मुद्रा बचानी होगी। प्रधानमंत्री ने लोगों से पेट्रोल और डीजल की खपत कम करने, शहरों में मेट्रो रेल सेवाओं का अधिक उपयोग करने, कारपूलिंग अपनाने, इलेक्ट्रिक वाहनों का इस्तेमाल बढ़ाने और पार्सल परिवहन के लिए रेलवे सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान देश ने घर से काम करने, वर्चुअल मीटिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे विकल्पों को सफलतापूर्वक अपनाया था और अब जरूरत पड़ने पर इन उपायों को फिर से लागू किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने विदेशी मुद्रा संरक्षण के लिए एक वर्ष तक सोने की खरीद और विदेश यात्राओं को स्थगित करने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि नागरिक थोड़े समय के लिए संयम बरतें तो देश बड़े आर्थिक दबावों से उबर सकता है। साथ ही उन्होंने खाद्य तेल की खपत कम करने, रासायनिक उर्वरकों के उपयोग में कटौती करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और स्वदेशी उत्पादों के अधिकाधिक उपयोग की अपील की।
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