Jul 11, 2026

जलजनित बीमारियों के प्रकोप को तेजी से रोकने के लिए झारखंड में एसडीआरएफ और स्वास्थ्य टीमें एकीकृत

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रांची। मानसून के दौरान डेंगू और चिकनगुनिया के बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड सरकार ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने सभी जिलों के उपायुक्तों को विस्तृत एडवाइजरी जारी करते हुए संक्रमण की रोकथाम के लिए तत्काल प्रभाव से व्यापक अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट करने, घर-घर लार्वा सर्वे कराने और लोगों को जागरूक बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ काम करना होगा।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने निर्देश दिया है कि लगातार हो रही बारिश के कारण जहां-जहां जल जमाव की स्थिति बन रही है, उन क्षेत्रों की विशेष निगरानी की जाए। उन्होंने कहा कि डेंगू और चिकनगुनिया फैलाने वाले मच्छरों के प्रजनन स्थलों को प्राथमिकता के आधार पर समाप्त किया जाए, ताकि संक्रमण फैलने से पहले ही उस पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी में बताया गया है कि डेंगू और चिकनगुनिया एडीज मादा मच्छर के काटने से फैलने वाले वायरल रोग हैं। यह मच्छर साफ और रुके हुए पानी में तेजी से पनपता है। घरों के भीतर या आसपास रखे पानी से भरे बर्तन, कूलर, प्लास्टिक की बोतलें, खुली पानी की टंकियां, पुराने टायर, गमले और कबाड़ में जमा पानी इसके प्रमुख प्रजनन स्थल हैं। ऐसे स्थानों की नियमित सफाई और जल जमाव समाप्त करने पर विशेष जोर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने नगर निगम, नगर परिषद, स्थानीय प्रशासन, बहुउद्देशीय स्वास्थ्य कर्मियों (एमपीडब्ल्यू), सामुदायिक स्वयंसेवकों और सहियाओं के सहयोग से राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। अभियान के तहत प्रत्येक जिले में संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर मच्छरों के प्रजनन स्थलों को नष्ट किया जाएगा। सभी उपायुक्तों से विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर राज्य मुख्यालय को भेजने और डेंगू-चिकनगुनिया नियंत्रण गतिविधियों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने को कहा गया है। एडवाइजरी में 'वेक्टर सर्विलांस' को अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इसके तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर जाकर मच्छरों के लार्वा की जांच करेंगी और जहां भी लार्वा मिलेगा, उसे तत्काल नष्ट किया जाएगा। इस कार्य के लिए प्लास्टिक डिपर, प्लास्टिक पाइपेट, लार्वा संग्रह शीशी समेत सभी आवश्यक उपकरण उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सर्वे और नियंत्रण अभियान प्रभावी ढंग से संचालित हो सके। स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की है। विभाग ने कहा है कि लोग अपने घरों और आसपास कहीं भी पानी जमा न होने दें। कूलर, पानी की टंकियों, बाल्टियों और अन्य बर्तनों की नियमित सफाई करें तथा पानी की टंकियों को हमेशा ढककर रखें। इसके अलावा पुराने टायर, टूटे बर्तन और कबाड़ में जमा पानी को तुरंत हटाया जाए, क्योंकि यही स्थान मच्छरों के पनपने के सबसे बड़े स्रोत बनते हैं। विभाग ने लोगों को सलाह दी है कि यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जोड़ों में दर्द या अन्य संदिग्ध लक्षण दिखाई दें तो बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने के बजाय तुरंत नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल में जांच कराएं। समय पर जांच और उपचार से डेंगू तथा चिकनगुनिया से होने वाली जटिलताओं से बचा जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों पर केवल सरकारी प्रयासों से पूरी तरह नियंत्रण संभव नहीं है। इसके लिए प्रशासन और आम जनता की संयुक्त भागीदारी बेहद जरूरी है। यदि लोग अपने घरों और आसपास साफ-सफाई बनाए रखें, जल जमाव रोकें और स्वास्थ्य विभाग के दिशा-निर्देशों का पालन करें, तो मानसून के दौरान इन बीमारियों के बढ़ते खतरे को काफी हद तक रोका जा सकता है। सरकार ने सभी जिलों को सतर्क रहते हुए अभियान की नियमित निगरानी करने और हर स्तर पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।