Apr 14, 2026

10 वर्षों के लिए उत्तराखंड के वनों का मास्टर प्लान तैयार, जायका फेज-2 बदलेगा पर्यावरण की तस्वीर

post-img

देहरादून। उत्तराखंड के जंगलों के संरक्षण, जैव विविधता और ग्रामीणों की आजीविका को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक महायोजना तैयार की जा रही है। जापान इंटरनेशनल को-ऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा वित्त पोषित 'उत्तराखण्ड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना' के पहले चरण की शानदार सफलता के बाद अब दूसरे चरण (फेज-2) का खाका तैयार कर लिया गया है। इस सिलसिले में जायका इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात कर आगामी 1500 करोड़ रुपये की परियोजना पर विस्तृत चर्चा की।

उत्तराखंड में वन संरक्षण, जैव विविधता और स्थानीय आजीविका को मजबूत करने के लिए जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा वित्त पोषित उत्तराखंड वन संसाधन प्रबंधन परियोजना के दूसरे चरण (फेज-2) की रूपरेखा तैयार हो रही है। इस परियोजना की कुल लागत 1500 करोड़ रुपये आंकी गई है। जेआईसीए इंडिया के मुख्य प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने हाल ही में वन एवं पर्यावरण मंत्री सुबोध उनियाल से मुलाकात की और परियोजना की प्रगति तथा प्रस्तावित फेज-2 पर विस्तृत चर्चा की। पहले चरण में परियोजना राज्य के 13 वन प्रभागों के अंतर्गत 36 रेंजों और 839 वन पंचायतों में संचालित हुई। इसमें निर्धारित 38,000 हेक्टेयर के मुकाबले 38,393 हेक्टेयर क्षेत्र में ईको-रेस्टोरेशन कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। वित्तीय प्रगति भी सराहनीय रही। 807 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 95 प्रतिशत से अधिक राशि व्यय की जा चुकी है और 93 प्रतिशत से अधिक प्रतिपूर्ति दावे प्राप्त हो चुके हैं। परियोजना के सामाजिक आयाम भी मजबूत रहे। 839 वन पंचायतों में 1503 स्वयं सहायता समूह गठित किए गए और 20 क्लस्टर फेडरेशन सक्रिय हैं। राज्य स्तर पर एक शीर्षस्थ फेडरेशन भी स्थापित किया गया है। आजीविका संवर्धन के तहत 18 मूल्य वृद्धि श्रृंखलाओं पर काम हुआ, जिसमें सेब उत्पादन, मधुमक्खी पालन और अखरोट रोपण जैसी गतिविधियां शामिल हैं। भू-कटाव रोकने के लिए जापानी तकनीक का उपयोग करते हुए तीन मॉडल साइट्स और चार कैंडिडेट साइट्स पर कार्य तेजी से चल रहा है, जिन्हें इस माह के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। दूसरा चरण वर्ष 2026 से 2035 तक (10 वर्ष) चलेगा। इसमें राज्य के 47 वन रेंजों को शामिल किया जाएगा। इस चरण में ईको-रेस्टोरेशन, जड़ी-बूटी रोपण, कृषि वानिकी, मानव-वन्यजीव संघर्ष न्यूनीकरण और जैव विविधता संरक्षण पर विशेष जोर दिया जाएगा। परियोजना की 85 प्रतिशत लागत जेआईसीए वहन करेगा, जबकि 15 प्रतिशत हिस्सा उत्तराखंड राज्य सरकार उठाएगी। वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि यह परियोजना न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों के ग्रामीणों की आजीविका को भी सशक्त बनाएगी। जेआईसीए प्रतिनिधि टेकुची टकुरो ने परियोजना की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया और फेज-2 को और अधिक प्रभावी बनाने का आश्वासन दिया। यह परियोजना उत्तराखंड के लिए पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का एक उत्कृष्ट मॉडल साबित हो रही है। यदि फेज-2 सफल रहा तो राज्य के वन क्षेत्रों में एक नया अध्याय शुरू होगा, जो आने वाले दशक में पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों को संतुलित रूप से मजबूत करेगा।