Oct 09, 2026
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उत्तराखंड विधानसभा का अगला सत्र गैरसैंण में होने के आसार,तैयारियों को लेकर सीएम व विस अध्यक्ष के बीच हुई चर्चा

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उत्तराखंड की राजनीति का केंद्र एक बार फिर ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण (भराड़ीसैंण) बनने जा रहा है। प्रदेश में आगामी विधानसभा सत्र को लेकर सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री आवास में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण के बीच हुई उच्चस्तरीय शिष्टाचार मुलाकात के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि सरकार आगामी सत्र को गैरसैंण में आयोजित करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

उत्तराखंड विधानसभा का आगामी सत्र ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में आयोजित होने की संभावना के बीच राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। सत्र की तारीख और स्थान को लेकर सरकार ने अभी अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया है, लेकिन विधानसभा सचिवालय ने गैरसैंण और देहरादून, दोनों स्थानों पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के बीच हुई मुलाकात के बाद सत्र के आयोजन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधानसभा अध्यक्ष के अनुसार, सत्र 30 अक्टूबर से पहले होना है और सचिवालय दोनों स्थानों पर आयोजन के लिए तैयार है। बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री आवास में विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात की। इस दौरान आगामी विधानसभा सत्र की तैयारियों और व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा हुई। हालांकि, बैठक के बाद भी सत्र की तारीख और स्थान को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई। गैरसैंण उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी है और यहां विधानसभा सत्र आयोजित करना राज्य की पर्वतीय क्षेत्रों के प्रति प्रतिबद्धता से भी जुड़ा माना जाता है। ऐसे में यदि आगामी सत्र गैरसैंण में होता है, तो एक बार फिर राज्य की राजधानी व्यवस्था और पहाड़ों के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा केंद्रित हो सकती है। वहीं, देहरादून में सत्र आयोजित किए जाने की संभावना भी बनी हुई है। विधानसभा सचिवालय की ओर से दोनों स्थानों पर तैयारियां जारी रहने से स्पष्ट है कि अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लिया जाना है। विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी भूषण ने कहा कि सत्र कब और कहां आयोजित करना है, इसका निर्णय सरकार को लेना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विधानसभा सचिवालय गैरसैंण और देहरादून, दोनों जगह सत्र कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके मुताबिक, 30 अक्टूबर से पहले सत्र आयोजित होना है। अब सबकी निगाहें सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। सत्र के स्थान और तारीख की घोषणा के बाद ही विधायी कार्यवाही, प्रशासनिक व्यवस्थाओं और संबंधित तैयारियों की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान विधानसभा अध्यक्ष ने कोटद्वार विधानसभा क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों का विषय भी उठाया। उन्होंने कोटद्वार को जिला बनाने की अपनी मांग दोहराई और नवनिर्मित बस अड्डे सहित अन्य विकास योजनाओं के लोकार्पण के लिए मुख्यमंत्री को कोटद्वार आने का निमंत्रण दिया। विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोटद्वार गढ़वाल का प्रवेश द्वार होने के साथ महत्वपूर्ण भौगोलिक और प्रशासनिक केंद्र भी है। क्षेत्र की बढ़ती आवश्यकताओं को देखते हुए इसे जिला बनाए जाने से लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं अधिक सुगमता से उपलब्ध हो सकेंगी। आगामी विधानसभा सत्र में राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। गैरसैंण में सत्र आयोजित होने की स्थिति में पर्वतीय क्षेत्रों के विकास, बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक पहुंच जैसे विषयों पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। वहीं, कोटद्वार को जिला बनाने की मांग भी एक बार फिर चर्चा में आ गई है। फिलहाल सत्र के आयोजन स्थल को लेकर अंतिम फैसला सरकार के हाथ में है। गैरसैंण या देहरादून—कहां विधानसभा की कार्यवाही होगी, इसका इंतजार राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक किया जा रहा है।