Jul 10, 2026

दीपक रावत और आनंद स्वरूप सहित कई उच्चाधिकारी वर्चुअल बैठक में रहे मौजूद

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चुनावों और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए निर्वाचन विभाग ने अपनी कमर कस ली है। राज्य के पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में 'विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान' को त्रुटिहीन और सुगम बनाने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में कुमाऊं और गढ़वाल के मंडल आयुक्तों (कमिश्नरों) सहित सभी जिलों के जिलाधिकारियों को पुख्ता इंतजाम करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों, विशेषकर पहाड़ी जिलों में मानसून के दौरान होने वाली दिक्कतों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में सड़कें अवरुद्ध होने से आम जनता की आवाजाही प्रभावित होती है। इसे ध्यान में रखते हुए मतदाताओं की सुविधा के लिए पहले से ही विशेष इंतजाम किए जाएं।

पहाड़ी क्षेत्रों में नोटिस के जवाब और दावे-आपत्तियों के निस्तारण के लिए अब मतदाताओं को दूर नहीं भटकना पड़ेगा। इसके लिए न्याय पंचायत स्तर पर 'क्लस्टर' बनाकर कैंप लगाने हेतु एक विस्तृत रोस्टर तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, मैदानी क्षेत्रों के मतदाताओं की सुविधा के लिए तहसील के अलावा नगर निगम, नगर पंचायत और वार्ड स्तर पर भी कैंप का रोस्टर बनाने को कहा गया है। डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सख्त लहजे में निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मतदाताओं के नोटिस और दावों पर सुनवाई करेंगे, वहां बुनियादी सुविधाओं की कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इन केंद्रों पर अनिवार्य रूप से निर्बाध बिजली और पेयजल की व्यवस्था हो। ऑनलाइन कार्यों के लिए सुदृढ़ इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध हो। दस्तावेजों के रख-रखाव के लिए स्कैनर और फोटोकॉपी मशीन का उचित प्रबंध हो। दस्तावेजों के त्वरित और सटीक सत्यापन (डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन) के लिए शिक्षा,राजस्व और तहसील सहित संबंधित विभागों से नोडल अधिकारियों को नामित किया जाएगा, जो ईआरओ और  एईआरओ की सहायता करेंगे। राज्य में इस महा-अभियान को पारदर्शी और सुचारू रूप से चलाने के लिए वर्तमान में 70 ईआरओ के साथ 800 एईआरओ तैनात किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिलाधिकारियों को छूट दी है कि जिन जिलों में कार्य की अधिकता को देखते हुए एईआरओ की संख्या बढ़ाई जानी है, वे शनिवार तक मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय को अपना प्रस्ताव भेज दें, ताकि समय पर तैनाती की जा सके। इसके साथ ही, दोनों मंडलों के कमिश्नरों को निर्देशित किया गया है कि वे 14 जुलाई से जिलों का फील्ड विजिट कर स्थलीय निरीक्षण शुरू करें। अभियान में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी जिलाधिकारियों और ईआरओ को निर्देशित किया गया है कि वे जिला एवं विधानसभा स्तर पर मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ समय पर बैठक करें। इस बैठक के दौरान राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ड्राफ्ट मतदाता सूची सौंपी जाएगी और उनसे सुझाव व सहयोग लिया जाएगा। इस उच्चस्तरीय वर्चुअल बैठक में कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत, गढ़वाल कमिश्नर आनंद स्वरूप, अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे, संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रकाश चंद्र दुम्का, उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी किशन सिंह नेगी और सहायक मुख्य निर्वाचन अधिकारी मस्तू दास सहित प्रदेश के सभी जनपदों के जिलाधिकारी और निर्वाचन अधिकारी उपस्थित रहे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि नोटिस फेज और दावे-आपत्तियों के निस्तारण के दौरान मतदाताओं को कोई बेवजह परेशानी नहीं होनी चाहिए। सुदूर पहाड़ी क्षेत्रों में भी डिजिटल कनेक्टिविटी दुरुस्त रखने पर जोर, ताकि ऑनलाइन डेटा फीडिंग में कोई रुकावट न आए।14 जुलाई से प्रशासनिक कमिश्नर खुद जमीन पर उतरकर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे।