देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेनि) गुरमीत सिंह ने प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए 'विकसित भारत @2047' के महासंकल्प के लिए ज्ञान-संपन्न युवा ऊर्जा और महिला सशक्तिकरण को सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का नया भारत अपनी युवा शक्ति के बल पर आगे बढ़ रहा है और हमारी युवा आबादी किसी भी बाहरी सोच या विदेशी मॉडल की मोहताज नहीं है।
स्वतंत्रता दिवस पर उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह ने देश की युवा शक्ति को भारत की सबसे बड़ी ताकत बताते हुए कहा कि भारत के युवाओं को किसी बाहरी सोच या मॉडल की जरूरत नहीं है। उनकी ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार की क्षमता देश की 5000 वर्ष पुरानी सभ्यता और आधुनिक तकनीक के संगम से विकसित हो रही है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त केवल स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि वर्तमान उपलब्धियों का मूल्यांकन करते हुए ‘विकसित भारत @2047’ के संकल्प को मजबूत करने का दिन भी है। राज्यपाल ने कहा कि आज दुनिया आर्थिक अनिश्चितता, जलवायु परिवर्तन और भू-राजनीतिक चुनौतियों से जूझ रही है, लेकिन भारत अपनी युवा शक्ति के बल पर नए लक्ष्यों की ओर बढ़ रहा है। आज युवाओं के हाथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और डेटा साइंस जैसी अत्याधुनिक तकनीक है तो उनके भीतर ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना और राष्ट्रसेवा का संकल्प भी मौजूद है। राज्यपाल ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की असली ताकत केवल उसकी बड़ी आबादी नहीं, बल्कि ज्ञान और कौशल से संपन्न युवा ऊर्जा है। जरूरत इस बात की है कि युवाओं को केवल ‘जॉब सीकर’ के रूप में देखने के बजाय उन्हें जॉब क्रिएटर, शोधकर्ता और राष्ट्र निर्माता बनने के अवसर दिए जाएं। उन्होंने कहा कि रोजगार और कौशल विकास के लिए केंद्र सरकार की योजनाएं युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में ‘इंडिया एआई मिशन’ को भी महत्वपूर्ण कदम बताते हुए उन्होंने कहा कि देश में बड़ी एआई कंप्यूटिंग क्षमता विकसित की जा रही है। इससे स्टार्टअप, शोधकर्ता और नवाचारकर्ता भारतीय जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी समाधान तैयार कर सकेंगे। राज्यपाल ने कहा कि एआई का उद्देश्य केवल सूचना या संवाद तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका इस्तेमाल मौसम के सटीक पूर्वानुमान, किसानों की सहायता, सरकारी योजनाओं की निगरानी, संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और नागरिक सेवाओं को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में किया जा सकता है। तकनीक और मानवीय संवेदना का मेल ही वास्तविक सुशासन का आधार बनेगा। उन्होंने अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में नेशनल रिसर्च फाउंडेशन को भी महत्वपूर्ण बताया। राज्यपाल के मुताबिक विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों में होने वाला अनुसंधान प्रयोगशालाओं और शोध पत्रों तक सीमित न रहकर पेटेंट, नई दवाओं, आधुनिक कृषि तकनीकों और स्वदेशी उत्पादों में बदलना चाहिए। इससे युवाओं के विचारों को स्टार्टअप और वास्तविक उत्पादों में बदलने का रास्ता खुलेगा। राज्यपाल ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में महिलाओं की समान और प्रभावी भागीदारी बेहद जरूरी है। बेटियां शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन, न्यायपालिका, उद्यमिता और सशस्त्र बलों में नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों और ‘लखपति दीदी’ जैसे प्रयासों ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ गांवों की अर्थव्यवस्था को भी गति दी है। राज्यपाल ने उत्तराखंड को ‘विकसित भारत @2047’ की यात्रा में महत्वपूर्ण विकास इंजन बताया। उन्होंने कहा कि नीति आयोग के एसडीजी इंडिया इंडेक्स2023-24 में उत्तराखंड का प्रथम स्थान हासिल करना सतत विकास और सुशासन की दिशा में राज्य की उपलब्धियों को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि राज्य का स्टार्टअप इकोसिस्टम एआई, एग्रोटेक, ग्रीन एनर्जी और बायोटेक जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं को आकार दे रहा है। बेहतर उद्योग नीतियां, सिंगल विंडो सिस्टम और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट जैसे प्रयास उत्तराखंड को निवेश के लिए आकर्षक बना रहे हैं। राज्यपाल ने चारधाम ऑल-वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना तथा हवाई और डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार को राज्य की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण बताया। पर्यटन अब धार्मिक यात्राओं तक सीमित नहीं है, बल्कि शीतकालीन, साहसिक और ‘उत्तराखंड में शादी’ जैसी नई अवधारणाओं के साथ विस्तार ले रहा है। ‘ग्राम्या’ और ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ के माध्यम से स्थानीय उत्पाद, जैविक खेती, सुगंधित पौधे, होमस्टे और बागवानी उत्पाद बड़े बाजारों तक पहुंच रहे हैं। उन्होंने सीमांत क्षेत्रों में विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के संबंध को भी रेखांकित किया। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के माध्यम से सीमांत गांवों को देश के अंतिम नहीं, बल्कि ‘प्रथम गांव’ के रूप में देखने की सोच विकसित हुई है। सड़क, संचार और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार से इन क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर बन रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि स्वतंत्रता तभी सार्थक होगी, जब नागरिक अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों को भी समझें। भारत आर्थिक और तकनीकी शक्ति बनने के साथ अपनी वेद, उपनिषद, संस्कृत, योग और आयुर्वेद जैसी ज्ञान परंपराओं के आधुनिक एवं वैज्ञानिक पुनरुत्थान के जरिए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।