Oct 11, 2026
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जयकारों और बर्फबारी के बीच हेमकुंड साहिब के कपाट बंद, अंतिम दिन सरहद पार पाकिस्तान से भी पहुंचे सिख श्रद्धालु

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चमोली। सिखों के प्रसिद्ध और पवित्र हिमालयी धाम श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को हल्की बर्फबारी और भक्तिमय वातावरण के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। दोपहर ठीक एक बजे पांच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को पूरे विधि-विधान व मर्यादा के साथ दरबार साहिब से उठाकर सचखंड में सुरक्षित विराजमान किया गया। इस पावन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं के ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के गगनभेदी जयकारों से संपूर्ण हेमकुंड साहिब और आसपास की पर्वत शृंखलाएं गूंज उठीं।

उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ श्री हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को हल्की बर्फबारी के बीच शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। वर्ष की अंतिम अरदास, शबद-कीर्तन और धार्मिक परंपराओं के बीच दोपहर ठीक एक बजे पांच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को दरबार साहिब से सचखंड में सुरक्षित विराजमान किया गया। कपाट बंद होने के इस भावुक अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए और गुरु महाराज के समक्ष शीश नवाया। खास बात यह रही कि अंतिम दिन पाकिस्तान से आए 40 सदस्यीय सिख जत्थे ने भी दरबार साहिब में मत्था टेककर आशीर्वाद लिया। इस दौरान पूरा तीर्थ क्षेत्र ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंज उठा। हेमकुंड साहिब के कपाट बंद करने की प्रक्रिया शनिवार सुबह दस बजे सुखमनी साहिब के पाठ के साथ शुरू हुई। सुबह 11:15 बजे संतों ने शबद-कीर्तन में भाग लिया। दोपहर 12:30 बजे मुख्य ग्रंथी हरमीर सिंह ने वर्ष की अंतिम अरदास की। इसके बाद पौने एक बजे यात्रा का अंतिम हुकमनामा लिया गया। निर्धारित धार्मिक परंपराओं के पालन के बाद दोपहर ठीक एक बजे पांच प्यारों की अगुवाई में गुरु ग्रंथ साहिब को सचखंड में सुरक्षित विराजमान किया गया। इस तरह वर्ष की तीर्थयात्रा का समापन हुआ। हल्की बर्फबारी और ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हुआ। संगत ने हेम सरोवर में स्नान किया और दरबार साहिब में मत्था टेककर अंतिम दर्शन किए। कपाट बंद होने के अवसर पर पाकिस्तान से आए 40 लोगों के जत्थे की मौजूदगी विशेष आकर्षण रही। इसके अलावा अमेरिका और इंग्लैंड से करीब 30 श्रद्धालुओं की संगत तथा फ्रांस से सात सिख श्रद्धालु भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। दिल्ली, पंजाब, उत्तराखंड, ओडिशा, मुंबई, हरियाणा और भोपाल से आए श्रद्धालुओं ने भी धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। हिमालय की ऊंचाइयों पर स्थित इस पवित्र तीर्थ में अलग-अलग देशों और राज्यों से श्रद्धालुओं का पहुंचना सिख धर्म के प्रति उनकी गहरी आस्था को दर्शाता है। बर्फबारी के बीच अरदास और जयकारों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गुरुद्वारा गोविंदघाट के मुख्य प्रबंधक सेवा सिंह ने बताया कि कपाट बंद होने के अवसर पर सेना के बैंड की मधुर स्वर लहरियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। धार्मिक कार्यक्रमों के समापन के बाद घांघरिया गुरुद्वारे में भी श्रद्धालुओं को हलवा, दूध, पकौड़े और खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया गया। गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्रजीत सिंह बिंद्रा ने यात्रा के सफल संचालन के लिए श्रद्धालुओं, प्रदेश सरकार और प्रशासन का आभार जताया। उन्होंने यात्रा से जुड़े सभी लोगों के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। हेमकुंड साहिब के साथ ही भगवान लक्ष्मण लोकपाल मंदिर के कपाट भी शनिवार को शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। मान्यता है कि भगवान लक्ष्मण ने पूर्व जन्म में हेमकुंड सरोवर के किनारे मानव कल्याण के लिए कठिन तपस्या की थी। भगवान लक्ष्मण लोकपाल को भ्यूंडार घाटी का इष्ट देव माना जाता है। इसी धार्मिक परंपरा के तहत हेमकुंड साहिब के कपाट खुलने के दिन लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी खोले जाते हैं। भ्यूंडार निवासी गिरीश चौहान और बबलू चौहान के अनुसार, घाटी के दर्जनों ग्रामीण सुबह अपने घरों से अनाज से तैयार प्रसाद लेकर मंदिर पहुंचे। पूजा-अर्चना और धार्मिक रीति-रिवाजों के निर्वहन के बाद मंदिर के कपाट भी शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए। हेमकुंड साहिब के कपाट बंद होने के साथ ही इस वर्ष की यात्रा संपन्न हो गई। हिमालयी क्षेत्र में बढ़ती ठंड और बर्फबारी के बीच अब तीर्थस्थल शीतकालीन विराम में रहेगा। अंतिम दिन श्रद्धालुओं की मौजूदगी, पाकिस्तान से आए जत्थे की सहभागिता और धार्मिक परंपराओं के बीच संपन्न हुआ कपाट बंदी समारोह संगत के लिए भावुक और यादगार पल बन गया।