उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बृहस्पतिवार को प्रयागराज पहुंचे और तेलियरगंज स्थित प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी ग्राउंड में एक भव्य मतदाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उनके साथ मंच पर उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने तेलियरगंज चौराहा के पास स्वतंत्रता सेनानी और जननेता बाबू मसूरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया और घोषणा की कि अब इस चौराहे और क्षेत्र की किसी प्रमुख संस्था का नाम भी बाबू मसूरियादीन के नाम पर रखा जाएगा।
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बृहस्पतिवार को प्रयागराज के तेलियरगंज में बाबू मसुरियादीन पासी की प्रतिमा का अनावरण किया। इस दौरान उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक जागरूकता में उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि महापुरुषों को सम्मान देकर ही देश आगे बढ़ सकता है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि जिस चौराहे पर बाबू मसुरियादीन पासी की प्रतिमा स्थापित की गई है, उसका नाम उनके नाम पर रखा जाएगा। साथ ही प्रयागराज की किसी संस्था का नाम भी उनके नाम पर रखने की बात कही। मुख्यमंत्री दोपहर करीब डेढ़ बजे प्रयागराज पहुंचे। उन्होंने तेलियरगंज चौराहे के पास प्रतिमा का अनावरण करने के बाद क्षेत्रीय मुद्रण प्रौद्योगिकी संस्थान के मैदान में आयोजित जनसभा को संबोधित किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी मौजूद रहे। जनसभा में मुख्यमंत्री ने बाबू मसुरियादीन पासी के जीवन, संघर्ष और राजनीतिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के लिए संघर्ष करने वाले महापुरुषों को उचित सम्मान मिलना चाहिए। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बाबू मसुरियादीन पासी ने देश की आजादी के लिए संघर्ष करते हुए नौ साल जेल में बिताए। जेल से बाहर आने के बाद भी वह जनजागरण के कार्य में सक्रिय रहे। मुख्यमंत्री के अनुसार, वर्ष 1945 में वह विधानसभा के सदस्य चुने गए और स्वतंत्रता के बाद 1952 से 1972 के बीच चार बार संसद पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनके राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 1952 में एक निर्वाचन क्षेत्र से दो सांसद चुने जाने की व्यवस्था के तहत जवाहरलाल नेहरू और मसुरियादीन पासी दोनों संसद पहुंचे थे। उन्होंने कहा कि मसुरियादीन पासी ने काले कानूनों के खिलाफ आवाज उठाई और सोनकर तथा पासी समाज को राष्ट्र की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम किया। उनके प्रयासों ने समाज के लोगों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के लिए कुर्बानी देने वाले और समाज को दिशा देने वाले महापुरुषों का सम्मान किसी परिवार की बपौती नहीं हो सकता। उनके योगदान को याद रखना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है। योगी ने कहा कि समाज और राष्ट्र के निर्माण में योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मान मिलना चाहिए, चाहे वे किसी भी वर्ग या समुदाय से जुड़े रहे हों। उन्होंने बाबू मसुरियादीन पासी की प्रतिमा के अनावरण को उनके योगदान को याद करने का अवसर बताया। चौराहे और किसी संस्था का नाम उनके नाम पर रखने की घोषणा को भी इसी सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। मुख्यमंत्री की जनसभा के दौरान प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक (टीजीटी) और प्रवक्ता संवर्ग (पीजीटी) भर्ती के अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को लेकर तख्तियां लहराईं और नारेबाजी की। अभ्यर्थियों का कहना था कि वे लंबे समय से पुरानी नियमावली के तहत भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर अब तक ध्यान नहीं दिया गया है। इस तरह कार्यक्रम में एक ओर स्वतंत्रता सेनानी बाबू मसुरियादीन पासी के योगदान को सम्मानित किया गया, वहीं दूसरी ओर भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी भी सामने आई। अब देखना होगा कि टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों की मांग पर सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं।