Feb 17, 2026

शिक्षा विभाग ने बोर्ड परीक्षा के लिए पूर्ण तैयारी का दावा किया

post-img

देहरादून। उत्तराखंड बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाएं 21 फरवरी से पूरे प्रदेश में शुरू हो रही हैं। इस वर्ष कुल 2,16,109 परीक्षार्थी बोर्ड परीक्षा में शामिल होंगे। इनमें हाईस्कूल के 1,12,660 और इंटरमीडिएट के 1,03,449 छात्र-छात्राएं शामिल हैं। परीक्षा को नकल-विहीन और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य, मंडल और जिला स्तर पर तीन-स्तरीय सचल दल गठित किए गए हैं, जो औचक निरीक्षण करेंगे।

शिक्षा विभाग ने परीक्षा की सभी तैयारियां पूरी होने का दावा किया है। इस वर्ष प्रदेशभर में 1261 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इनमें 50 एकल (गर्ल्स/ब्वॉयज) केंद्र और 1211 मिश्रित केंद्र शामिल हैं। संवेदनशीलता के आधार पर 156 परीक्षा केंद्रों को संवेदनशील और 6 को अति-संवेदनशील चिह्नित किया गया है। इसके अतिरिक्त 24 नए परीक्षा केंद्र भी इस वर्ष जोड़े गए हैं, ताकि छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके। जिलेवार आंकड़ों के अनुसार टिहरी जिले में सर्वाधिक 136 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जबकि चंपावत जिले में सबसे कम 44 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। बोर्ड सचिव विनोद कुमार सिमल्टी ने बताया कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के संस्थागत और व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर लिए गए हैं। प्रवेश पत्र जारी करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और जल्द ही सभी विद्यार्थियों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे। नकल पर प्रभावी नियंत्रण के लिए तीन-स्तरीय सचल दलों को विशेष अधिकार दिए गए हैं। ये दल परीक्षा केंद्रों पर अचानक निरीक्षण कर व्यवस्था, अनुशासन और गोपनीयता की जांच करेंगे। अति-संवेदनशील केंद्रों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी तथा आवश्यकता पड़ने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल की भी सहायता ली जाएगी। उत्तर पुस्तिकाओं के संकलन के लिए 39 केंद्र बनाए गए हैं, जबकि मूल्यांकन कार्य के लिए 29 केंद्र निर्धारित किए गए हैं। इनमें 16 केंद्र गढ़वाल मंडल और 13 केंद्र कुमाऊं मंडल में स्थापित किए जाएंगे। सभी मूल्यांकन केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य किए गए हैं, ताकि मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष बनी रहे।गौरतलब है कि बोर्ड की प्रयोगात्मक परीक्षाएं 16 जनवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी हैं। अब मुख्य लिखित परीक्षाएं 21 फरवरी से प्रारंभ होंगी। शिक्षा विभाग का कहना है कि इस बार परीक्षा संचालन, निगरानी और मूल्यांकन—तीनों स्तरों पर तकनीकी और प्रशासनिक सख्ती बरती जाएगी, ताकि परीक्षा पूरी तरह नकल-मुक्त और पारदर्शी वातावरण में संपन्न हो सके।