Feb 22, 2026

निदेशालय में गुंडागर्दी या प्रशासनिक तानाशाही? देहरादून पुलिस की जांच तय करेगी शनिवार को हुए हंगामे का असली गुनहगार

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देहरादून। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय में हुए मारपीट और हंगामे के मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। निदेशक कक्ष में हुई कथित अभद्रता, हाथापाई और तोड़फोड़ की घटना के बाद पुलिस ने क्रॉस FIR दर्ज कर जांच तेज कर दी है। वायरल वीडियो में दिख रहे एक हिस्ट्रीशीटर की मौजूदगी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि घटना में उसकी क्या भूमिका थी और वह वहां किस उद्देश्य से पहुंचा था।

मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रारंभिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौड़ियाल ने आरोप लगाया कि विधायक उमेश शर्मा काऊ और उनके समर्थकों ने उनके कक्ष में घुसकर गाली-गलौच की, मारपीट की और गोली मारने की धमकी दी। निदेशक की शिकायत पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है। दूसरी ओर, विधायक पक्ष की ओर से भी शिकायत दर्ज कराई गई है। विधायक के गनर कांस्टेबल सुशील रमोला की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अभद्रता और मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया है। इस प्रकार, मामले में क्रॉस FIR दर्ज होने से जांच की दिशा और भी जटिल हो गई है। घटना शनिवार को निदेशक कक्ष में हुई, जहां विधायक अपने समर्थकों के साथ एक स्कूल का नाम बदलने संबंधी प्रकरण को लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जो देखते ही देखते हंगामे और मारपीट में बदल गई। घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर हाथापाई और तोड़फोड़ के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कुछ चेहरे स्पष्ट रूप से नजर आ रहे हैं, जिनकी पहचान कर पुलिस ने हिरासत में लेने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया है और दोनों पक्षों की शिकायतों पर विधिक कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा रही है, ताकि घटनाक्रम की वास्तविकता और क्रम स्पष्ट हो सके। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्तियों की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है। सबसे ज्यादा चर्चा वीडियो में दिख रहे एक हिस्ट्रीशीटर को लेकर है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, उक्त व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से दर्ज है। अब यह जांच का विषय है कि वह निदेशक कक्ष में क्यों मौजूद था और क्या वह किसी पक्ष के साथ आया था या स्वतंत्र रूप से वहां पहुंचा था। एसएसपी ने पुष्टि की है कि उसकी पृष्ठभूमि और घटना में उसकी सक्रियता की जांच की जा रही है। यदि उसकी भूमिका आपराधिक पाई गई, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना ने शिक्षा विभाग और राजनीतिक गलियारों में बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या किसी प्रशासनिक कार्यालय में इस प्रकार का टकराव लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है? वहीं विधायक पक्ष का कहना है कि वे जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता की मांग को लेकर गए थे और उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। दूसरी ओर, निदेशक का आरोप है कि उन पर दबाव बनाने और धमकाने की कोशिश की गई। पुलिस अब घटनास्थल पर मौजूद कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज कर रही है। साथ ही सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल वीडियो की तकनीकी जांच कर साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। क्रॉस FIR के कारण पुलिस को दोनों पक्षों के दावों और आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी होगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और दोनों पक्ष अपने-अपने दावों पर अडिग हैं। आने वाले दिनों में पुलिस की रिपोर्ट और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। लेकिन इतना स्पष्ट है कि निदेशक कक्ष में हुआ यह टकराव अब केवल एक विवाद नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक मर्यादा की कसौटी बन गया है।