May 21, 2026

अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस पर उत्तराखंड की चाय इंडस्ट्री ग्रामीण विकास का नया इंजन बनकर उभरी

post-img

असम और दार्जिलिंग की चाय दुनियाभर में अपनी पहचान बना चुकी है, लेकिन अब उत्तराखंड भी चाय उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से उभरता हुआ नया केंद्र बनता जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर राज्य की पहाड़ियों से उठती चाय की खुशबू न केवल किसानों की आर्थिक तस्वीर बदल रही है, बल्कि उत्तराखंड को देश के प्रमुख चाय उत्पादक राज्यों की कतार में खड़ा करने की तैयारी भी कर रही है।

उत्तराखंड के 13 जिलों में से नौ जिलों में इस समय बड़े स्तर पर चाय का उत्पादन हो रहा है। करीब 1500 हेक्टेयर क्षेत्र में हर साल लगभग सात लाख किलो हरी चाय पत्तियों का उत्पादन किया जा रहा है, जिससे करीब 1.5 लाख किलो तैयार चाय बनाई जाती है। अब उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड ने उत्पादन बढ़ाकर 8.5 लाख किलो हरी पत्तियों तक पहुंचाने का लक्ष्य तय किया है। राज्य में चाय उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। बोर्ड किसानों से 40 रुपये प्रति किलो की दर से हरी पत्तियां खरीद रहा है, जिससे ग्रामीणों को बेहतर आमदनी मिल रही है। खास बात यह है कि चाय उत्पादन से राज्य के करीब चार हजार परिवार सीधे जुड़े हैं और हर साल लगभग सात लाख मानव दिवस रोजगार सृजित हो रहा है। इसमें 80 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है, जो खेत तैयार करने से लेकर पत्तियां तोड़ने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। चाय उत्पादन को मजबूत करने के लिए राज्य में पांच आधुनिक फैक्ट्रियां स्थापित की गई हैं। ये फैक्ट्रियां श्यामखेत (घोड़ाखाल), हरीनगरी (बागेश्वर), कौसानी, चंपावत और भटौली (चमोली) में संचालित हो रही हैं। वहीं नैनीताल में स्थापित मृदा परीक्षण केंद्र किसानों को यह जानकारी दे रहा है कि उनकी जमीन चाय उत्पादन के लिए कितनी उपयुक्त है। उत्तराखंड की चाय अपनी ताजगी, सुगंध और स्वाद के कारण धीरे-धीरे बाजार में पहचान बना रही है। राज्य की अधिकांश चाय कोलकाता की थोक मंडी के जरिए देश-विदेश के बाजारों तक पहुंच रही है। कई बड़ी कंपनियां यहां की चाय खरीदकर अपनी ब्रांडिंग के साथ बेच रही हैं। राज्य में अब जैविक चाय उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। वर्तमान में करीब 450 हेक्टेयर क्षेत्र में ऑर्गेनिक चाय की खेती हो रही है और ग्रीन टी की बढ़ती मांग किसानों के लिए नए अवसर खोल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टी टूरिज्म और जैविक खेती को बढ़ावा मिला तो उत्तराखंड आने वाले वर्षों में देश की चाय अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बन सकता है।