नैनीताल। जन स्वास्थ्य से खिलवाड़ और गंभीर लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक कार्रवाई की है। नैनीताल जिले के ज्योलीकोट और आसपास के इलाकों में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण फैले जलजनित रोगों से एक छात्र व एक विवाहिता की मौत और सैकड़ों ग्रामीणों के बीमार होने के मामले में शासन ने कड़ा रुख अपनाया है।
ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दूषित पेयजल से जल जनित रोग फैलने के मामले में आखिरकार प्रशासनिक जवाबदेही तय कर दी गई है। एक छात्र और एक विवाहिता की मौत तथा सैकड़ों ग्रामीणों के बीमार पड़ने के मामले में लापरवाही बरतने पर शासन ने जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट के आधार पर जल संस्थान के प्रभारी अधीक्षण अभियंता, सहायक अभियंता और अपर सहायक अभियंता समेत पेयजल निगम के प्रभारी अधिशासी अभियंता, प्रभारी सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जन स्वास्थ्य से सीधे जुड़े इस मामले में हुई कार्रवाई ने सरकारी विभागों में भी हलचल पैदा कर दी है। वहीं, नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को भी मामले में जिम्मेदार मानते हुए भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। राज्य गठन के बाद जनस्वास्थ्य से जुड़े किसी मामले में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में अधिकारियों पर कार्रवाई किए जाने को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। ज्योलीकोट और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में जून से ही दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर शिकायतें सामने आ रही थीं। ग्रामीणों का आरोप था कि पानी की गुणवत्ता खराब होने के कारण क्षेत्र में डायरिया, पीलिया और अन्य जल जनित बीमारियां फैल रही हैं। स्थिति गंभीर होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं होने का मामला सामने आया। इसके बाद क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोग बीमार पड़े और एक छात्र तथा एक विवाहिता की मौत ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया। मामले ने तब और तूल पकड़ा जब यह स्पष्ट हुआ कि पेयजल व्यवस्था की निगरानी और शिकायतों के निस्तारण में संबंधित विभागों की भूमिका सवालों के घेरे में है। जनस्वास्थ्य से जुड़े मामले में प्रशासनिक स्तर पर तत्काल हस्तक्षेप की जरूरत महसूस हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने सख्त रुख अपनाया और मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडे की अध्यक्षता में जांच समिति गठित की। समिति ने मामले से जुड़े तथ्यों और विभागीय स्तर पर हुई कार्रवाई की पड़ताल कर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजी। इसी रिपोर्ट के आधार पर शासन ने संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए निलंबन की कार्रवाई की है। इस मामले में नैनीताल हाई कोर्ट ने भी संज्ञान लिया था और मुख्य सचिव को मामले की निगरानी के निर्देश दिए थे। जिला प्रशासन की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि लापरवाही बरतने वाले जल संस्थान और पेयजल निगम के अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। अब शासन की कार्रवाई उसी दिशा में उठाया गया कदम है। जल संस्थान के मुख्य महाप्रबंधक की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रभारी अधीक्षण अभियंता विशाल कुमार को हल्द्वानी जल संस्थान से संबद्ध किया गया है। सहायक अभियंता मोहन सिंह रावत और अपर सहायक अभियंता रवींद्र को भी निलंबित कर अधीक्षण अभियंता कार्यालय हल्द्वानी से संबद्ध किया गया है। नैनीताल जल संस्थान के अधिशासी अभियंता अनीश पिल्लई को मामले में जिम्मेदार ठहराते हुए फिलहाल निलंबित नहीं किया गया, लेकिन भविष्य में कठोर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक रणवीर सिंह चौहान की ओर से जारी आदेश में निर्माण शाखा भीमताल के प्रभारी अधिशासी अभियंता शशिपाल सिंह, प्रभारी सहायक अभियंता संजय कुमार आर्या और कनिष्ठ अभियंता दीपांशु शर्मा को निलंबित किया गया है। तीनों को मुख्य अभियंता कुमाऊं कार्यालय और अधीक्षण अभियंता कार्यालय से संबद्ध किया गया है। वहीं, विभागीय कामकाज प्रभावित न हो, इसके लिए जल संस्थान लालकुआं के अधिशासी अभियंता नंदकिशोर को वर्तमान दायित्व के साथ अग्रिम आदेश तक अधीक्षण अभियंता हल्द्वानी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। ज्योलीकोट प्रकरण में निलंबन की कार्रवाई से प्रशासनिक जवाबदेही का संदेश जरूर गया है, लेकिन जनस्वास्थ्य के लिहाज से अब असली चुनौती दूषित पेयजल की समस्या का स्थायी समाधान है। ग्रामीणों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई, पेयजल स्रोतों की नियमित जांच, पाइपलाइन और जलाशयों की निगरानी तथा विभागों के बीच बेहतर समन्वय ही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोक सकता है। किसी भी क्षेत्र में पेयजल केवल सुविधा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। ज्योलीकोट की घटना ने यह सवाल भी सामने रखा है कि शिकायत आने और गंभीर बीमारी फैलने के बीच सरकारी तंत्र कितनी तेजी से सक्रिय होता है। इसलिए निलंबन की कार्रवाई के बाद अगला कदम व्यवस्था को जवाबदेह और भरोसेमंद बनाने का होना चाहिए।