Apr 08, 2026

उत्तराखंड में लोकतंत्र की मजबूती: आगामी मतदाता सत्यापन अभियान में बीएलओ की मदद को तैयार 20,863 बीएलए

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देहरादून। उत्तराखंड में आगामी चुनाव और मतदाता सूची के सुदृढ़ीकरण की दिशा में एक बड़ी प्रगति हुई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के प्रयासों और राजनीतिक दलों के सहयोग से प्रदेश में अब तक 20,863 बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) की नियुक्ति कर दी गई है। चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए राष्ट्रीय राजनीतिक दलों ने अपने-अपने स्तर पर बूथों पर नियुक्तियां तेज कर दी हैं, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन और पारदर्शी बनाना है। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने जानकारी देते हुए बताया कि मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के साथ हुई बैठकों के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। अधिकांश दलों ने अपने एजेंट नियुक्त कर दिए हैं। उन्होंने इस सक्रियता के लिए दलों का आभार व्यक्त किया है, साथ ही उन बूथों पर भी जल्द नियुक्तियां पूरी करने का अनुरोध किया है जहाँ अभी बीएलए तैनात नहीं किए गए हैं। निर्वाचन कार्यालय का लक्ष्य प्रदेश के प्रत्येक बूथ पर शत-प्रतिशत बीएलए की उपस्थिति सुनिश्चित करना है। आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के दो प्रमुख दलों, भाजपा और कांग्रेस ने अधिकांश बूथों को कवर कर लिया है। अब तक भाजपा ने राज्य में 89 प्रतिशत बीएलए नियुक्त कर दिए हैं, जबकि कांग्रेस 84 प्रतिशत के आंकड़े के साथ दूसरे स्थान पर है।

दलों द्वारा नियुक्तियों का ब्योरा:
भाजपा: 10,551 बीएलए
कांग्रेस: 9,869 बीएलए
सीपीआई (एम): 326 बीएलए
बसपा: 117 बीएलए

विशेष बात यह है कि उत्तराखंड के पांच जिलों में दोनों प्रमुख दलों ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए शत-प्रतिशत (100%) बीएलए नियुक्त करने का काम पूरा कर लिया है। वही डॉ. पुरुषोत्तम ने स्पष्ट किया कि बीएलए की भूमिका केवल चुनाव के दिन तक सीमित नहीं है। आगामी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान में इनकी जिम्मेदारी सबसे अहम होगी। बीएलए बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ समन्वय कर मतदाता सूची से दोहरे नाम हटाने, मृत मतदाताओं के नाम विलोपित करने और नए पात्र युवाओं के नाम जोड़ने में मदद करेंगे। निर्वाचन आयोग का मानना है कि राजनीतिक दलों के एजेंटों की मौजूदगी से मतदाता सूची के शुद्धिकरण में पारदर्शिता आती है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका कम हो जाती है। अब शासन और निर्वाचन कार्यालय का पूरा जोर शेष बचे 11 से 16 प्रतिशत बूथों पर जल्द से जल्द नियुक्तियां कराने पर है, ताकि आगामी चुनावी प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न किया जा सके।