Sep 02, 2026

ट्रांजिट कैंप के फुटबॉल मैदान पर फिर संकट! अतिक्रमण के बाद अब मेले की तैयारी, खिलाड़ियों में बढ़ा आक्रोश

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रुद्रपुर के ट्रांजिट कैंप फुटबॉल मैदान इन दिनों अपनी बदहाली और अस्तित्व की लड़ाई को लेकर चर्चा में है। वर्षों से अतिक्रमण की मार झेल रहे और राजनीतिक उपेक्षा का दंश सह रहे इस मैदान पर अब सार्वजनिक दुर्गा पूजा समिति की नजर टिक गई है। समिति इस खेल के मैदान पर कई दिवसीय भव्य मेला आयोजित करने की योजना बना रही है।

ट्रांजिट कैंप का फुटबॉल मैदान वर्षों से अतिक्रमण, उपेक्षा और राजनीतिक वादों के बीच अपनी पहचान बचाने की जद्दोजहद कर रहा है। कभी युवाओं के खेल और प्रतिभा का मैदान रहा यह परिसर अब लगातार सिकुड़ता जा रहा है। मैदान के आसपास हुए अतिक्रमण ने पहले ही इसकी उपयोगिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब इसी मैदान पर कई दिनों तक दुर्गा पूजा मेले के आयोजन की प्रस्तावित कवायद ने खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल केवल मेले के आयोजन का नहीं है, बल्कि उस सार्वजनिक स्थान के भविष्य का है, जहां वर्षों से बच्चे और युवा फुटबॉल खेलने पहुंचते हैं। स्थानीय खिलाड़ियों का कहना है कि मैदान पहले ही अपनी मूल स्थिति से काफी छोटा हो चुका है। ऐसे में यदि कई दिनों तक यहां मेला लगाया जाता है तो खेल गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित होंगी। साथ ही भारी आवाजाही, अस्थायी दुकानों, वाहनों और आयोजन के बाद मैदान की स्थिति को लेकर भी आशंकाएं हैं। ट्रांजिट कैंप के इस मैदान पर अतिक्रमण का मुद्दा नया नहीं है। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्षों से मैदान की जमीन को बचाने और उसका विकास कराने की मांग उठती रही है। जनप्रतिनिधियों और सरकारों के समक्ष भी मैदान की स्थिति सुधारने के लिए मांग रखी गई, लेकिन आज तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। यही वजह है कि खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों में व्यवस्था के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। विडंबना यह है कि जिस मैदान को बचाने और विकसित करने की जरूरत थी, उसकी जमीन और उपयोग को लेकर हर बार नया विवाद खड़ा हो जाता है। कभी अतिक्रमण का सवाल सामने आता है तो कभी किसी सार्वजनिक आयोजन के लिए मैदान के इस्तेमाल की मांग उठती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बच्चों और युवाओं के लिए बचे हुए खेल मैदान भी धीरे-धीरे दूसरे उपयोगों की भेंट चढ़ते जाएंगे? दुर्गा पूजा जैसे धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का अपना महत्व है। ऐसे आयोजनों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक स्थान उपलब्ध कराना भी प्रशासन और स्थानीय संस्थाओं की जिम्मेदारी है। लेकिन किसी ऐसे मैदान का चयन, जो पहले से ही अतिक्रमण और सीमित खेल क्षेत्र की समस्या से जूझ रहा हो, निश्चित तौर पर पुनर्विचार की मांग करता है। आयोजकों की ओर से खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों को समझाने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन असली समाधान सहमति और पारदर्शी व्यवस्था में ही है। यदि मेला आयोजित किया जाना है तो प्रशासन को पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि मैदान की खेल गतिविधियां प्रभावित न हों, आयोजन के बाद मैदान को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे और उसकी मूल स्थिति बहाल करने की जिम्मेदारी स्पष्ट रूप से तय हो। इस पूरे मामले में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें केवल आयोजन की अनुमति या व्यवस्था तक सीमित रहने के बजाय यह भी देखना चाहिए कि ट्रांजिट कैंप का एकमात्र प्रमुख खेल मैदान आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित कैसे रहे। धार्मिक आयोजन और खेल गतिविधियां एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। दोनों के लिए स्थान और व्यवस्था बनाई जा सकती है। जरूरत सिर्फ प्राथमिकताएं तय करने और सार्वजनिक संपत्ति के दीर्घकालिक हित को सामने रखने की है। ट्रांजिट कैंप के युवाओं की मांग को इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। उनका विरोध किसी धार्मिक आयोजन के खिलाफ नहीं, बल्कि उस मैदान को बचाने की चिंता के रूप में समझा जाना चाहिए, जहां वर्षों से उनकी खेल प्रतिभा आकार ले रही है। अब प्रशासन के सामने चुनौती साफ है मैदान को अतिक्रमण से बचाना है, खेलों के लिए सुरक्षित रखना है और यदि सार्वजनिक आयोजन होता है तो मैदान की मूल संरचना से कोई समझौता नहीं होने देना है। वरना आज मेले के लिए कुछ दिन और कल किसी दूसरे उपयोग के नाम पर मैदान का बचा-खुचा हिस्सा भी खत्म होता चला जाएगा।