Jul 04, 2026

स्टार्टअप्स के मामले में उत्तराखंड की लंबी छलांग: 2017 के शून्य से 2025 में 1750 का आंकड़ा पार

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पर्वतीय राज्य उत्तराखंड में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार की नई नीतियों ने धरातल पर कमाल दिखाना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार द्वारा लागू की गई उद्योग-अनुकूल नीतियों के कारण पिछले चार वर्षों के भीतर प्रदेश में 20 हजार से अधिक नए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम स्थापित हुए हैं, जिससे सीधे तौर पर एक लाख से अधिक लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 30 से अधिक औद्योगिक नीतियों में संशोधन कर और नई नीतियों को लागू कर राज्य में निवेश की राह को पूरी तरह सुगम बना दिया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड में एमएसएमई इकाइयों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2021-22 में जहां राज्य में एमएसएमई उद्योगों की कुल संख्या 59,798 थी, वहीं सरकार के प्रयासों से वर्ष 2024-25 में यह ग्राफ तेजी से बढ़कर 79,394 तक पहुंच गया है। उद्योगों की इस बढ़ती संख्या का सीधा लाभ राज्य के युवाओं को मिला है। एमएसएमई सेक्टर के तहत रोजगार पाने वाले नागरिकों की संख्या जो वर्ष 2022 में 3,43,922 थी, वह वर्ष 2025 में बढ़कर 4,56,605 हो गई है। उत्तराखंड अब सिर्फ पर्यटन ही नहीं, बल्कि देश के बड़े औद्योगिक हब के रूप में भी अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। राज्य में बड़े उद्योगों की संख्या वर्ष 2024-25 में बढ़कर 128 हो गई है। सबसे चौंकाने वाले और सुखद आंकड़े स्टार्टअप्स के क्षेत्र से आए हैं। वर्ष 2017 में उत्तराखंड में स्टार्टअप्स की संख्या शून्य थी, जो वर्तमान वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1,750 के पार पहुंच चुकी है। यही वजह है कि उत्तराखंड को आज देश में 'स्टार्टअप लीडर' और निर्यात तैयारी  के मामले में देश भर में पहला स्थान प्राप्त हुआ है। दिसंबर 2023 में आयोजित हुए उत्तराखंड वैश्विक निवेशक सम्मेलन के सुखद परिणाम अब सामने आने लगे हैं। सम्मेलन के दौरान कुल 3.57 लाख करोड़ रुपये के 1,779 निवेश प्रस्तावों पर एमओयू साइन किए गए थे। धामी सरकार की सक्रियता के चलते इनमें से अब तक रिकॉर्ड 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारा (ग्राउंडिंग की) जा चुका है। इस महा-निवेश के जरिए राज्य में 91,327 नए रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। धरातल पर उतरे निवेशों में से सबसे बड़ी हिस्सेदारी ऊर्जा (पावर) क्षेत्र की रही है, जिसमें उद्यमियों द्वारा सबसे अधिक 40 हजार करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है। इसके बाद विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और रियल एस्टेट सेक्टर में भी देश-विदेश के बड़े निवेशकों ने भारी दिलचस्पी दिखाई है। सरकार की इन दूरदर्शी नीतियों ने न सिर्फ पलायन पर रोक लगाने का काम किया है, बल्कि राज्य की आर्थिकी को भी एक नया और मजबूत आधार प्रदान किया है।