देवभूमि उत्तराखंड अपनी स्थापना के गौरवशाली 26 वर्ष पूर्ण कर चुका है। राज्य गठन के इस रजत जयंती वर्ष (26वें स्थापना दिवस) पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा प्रदेशवासियों को दी गई शुभकामनाएं और राज्य की विकास यात्रा का प्रस्तुत किया गया लेखा-जोखा यह रेखांकित करता है कि संघर्षों की कोख से जन्मा यह पर्वतीय राज्य आज विकास, आत्मनिर्भरता और सुशासन के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। अमर शहीदों, राज्य आंदोलनकारियों और इस भूभाग को पृथक् राज्य का दर्जा दिलाने वाले पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी को नमन करते हुए मुख्यमंत्री ने जिस प्रगति का खाका खींचा है, वह हर उत्तराखंडी के लिए गर्व का विषय है।
नौ नवंबर को अपने गठन के 26 वर्ष पूरे करने जा रहा है। राज्य स्थापना दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए राज्य आंदोलनकारियों, अमर शहीदों और पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी को नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश की 26 वर्षों की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए अर्थव्यवस्था, रोजगार, महिला सशक्तीकरण और जनकल्याण से जुड़ी उपलब्धियों का ब्योरा प्रस्तुत किया। उन्होंने दावा किया कि राज्य गठन के बाद प्रदेश की अर्थव्यवस्था का आकार 26 गुना और प्रति व्यक्ति आय 18 गुना तक बढ़ चुकी है। मुख्यमंत्री के अनुसार, कुशल वित्तीय प्रबंधन और विकास कार्यों के चलते प्रदेश की आर्थिक विकास दर 7.83 प्रतिशत दर्ज की गई है। गरीबी दर में भी उल्लेखनीय कमी आई है। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में गरीबी दर 32.70 प्रतिशत से घटकर 6.92 प्रतिशत रह गई है। वहीं, बेरोजगारी दर में 4.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है और श्रमबल की भागीदारी 45 प्रतिशत से बढ़कर 64 प्रतिशत तक पहुंच गई है। धामी ने इन आंकड़ों को प्रदेश की विकास यात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड वर्ष 2047 तक विकसित राज्य बनने के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए पिछले पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां दी गई हैं। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून भी लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। धामी ने सरकार के प्रमुख फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला देश का पहला राज्य बना है। इसके साथ ही जबरन धर्मांतरण रोकने के लिए कानून, सख्त भू-कानून और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई को भी सरकार के महत्वपूर्ण कदमों में शामिल बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश की व्यवस्था और सामाजिक हितों को मजबूत करना है। मातृशक्ति के सशक्तीकरण को लेकर मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकारी नौकरियों में महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है। इसके अलावा अब तक तीन लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। सैनिकों के सम्मान में देहरादून में सैन्य धाम का निर्माण और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाने के लिए हाउस ऑफ हिमालयाज ब्रांड की पहल का भी उन्होंने उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की 26 वर्षों की यात्रा आंदोलनकारियों के संघर्ष और प्रदेशवासियों के योगदान से आगे बढ़ी है। उन्होंने जनता से समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित उत्तराखंड के निर्माण में सहभागी बनने का आह्वान किया। स्थापना दिवस पर प्रस्तुत यह विकास खाका राज्य की उपलब्धियों के साथ वर्ष 2047 तक के लक्ष्य को भी रेखांकित करता है।