देहरादून। उत्तराखण्ड पुलिस के 25 वर्षों के गौरवशाली इतिहास, अदम्य अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और उत्कृष्ट जनसेवा को आज राष्ट्रीय स्तर पर सबसे बड़ा सम्मान मिला है। देहरादून स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की गरिमामयी मौजूदगी में उत्तराखण्ड पुलिस को प्रतिष्ठित 'राष्ट्रपति पुलिस निशान' से अलंकृत किया। इस अभूतपूर्व उपलब्धि के साथ ही उत्तराखण्ड यह सर्वोच्च सम्मान हासिल करने वाला देश का 16वां राज्य बन गया है।
उत्तराखंड पुलिस के इतिहास में शुक्रवार का दिन एक नई उपलब्धि और गौरव के अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। राज्य गठन के बाद 25 वर्षों तक सेवा, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और जनसुरक्षा के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए उत्तराखंड पुलिस को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस निशान से सम्मानित किया गया। देहरादून स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित भव्य अलंकरण समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की उपस्थिति में उत्तराखंड पुलिस को यह सम्मान प्रदान किया। इस उपलब्धि के साथ उत्तराखंड देश का 16वां राज्य बन गया है, जिसे राष्ट्रपति पुलिस निशान प्राप्त हुआ है। समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस परेड का निरीक्षण किया और राज्य पुलिस बल के अधिकारियों एवं जवानों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पुलिस निशान केवल एक सम्मान नहीं, बल्कि उत्तराखंड पुलिस के प्रत्येक अधिकारी और जवान के समर्पण, साहस, अनुशासन तथा सेवा भावना की राष्ट्रीय पहचान है। देवभूमि की भौगोलिक परिस्थितियों, सीमांत क्षेत्रों की चुनौतियों और लगातार बढ़ते पर्यटक एवं श्रद्धालुओं के दबाव के बीच पुलिस ने अपनी जिम्मेदारियों का जिस निष्ठा से निर्वहन किया है, वह सराहनीय है। अमित शाह ने कर्तव्य निर्वहन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले उत्तराखंड पुलिस के 206 वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि लगभग 13 हजार जवानों से शुरू हुई उत्तराखंड पुलिस की यात्रा आज 26 हजार से अधिक जवानों तक पहुंच चुकी है। चारधाम यात्रा, कुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों, पर्यटन व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान पुलिस की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्यों में जवानों ने साहस और संवेदनशीलता का परिचय दिया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड पुलिस ने तीन नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन, आधुनिक तकनीक, डिजिटल व्यवस्था और फॉरेंसिक विज्ञान के उपयोग की दिशा में उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। गृह मंत्री ने मई 2027 के बाद दर्ज होने वाले मामलों में तीन वर्ष के भीतर दोषियों को सजा दिलाने का लक्ष्य भी बताया। इसके लिए पुलिस, न्यायालय, अभियोजन और अन्य संबंधित व्यवस्थाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। गृह मंत्री ने नशे के विरुद्ध उत्तराखंड पुलिस की कार्रवाई और साइबर अपराधों की रोकथाम के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि नशामुक्त भारत के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उत्तराखंड को भी नशामुक्त बनाने की दिशा में प्रभावी प्रयास जारी रखने होंगे। सीमांत क्षेत्रों में विकास और सुरक्षा के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए उन्होंने पुलिस की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। विश्व पुलिस एवं अग्निशमन खेलों में उत्तराखंड पुलिस के खिलाड़ियों द्वारा 37 पदक जीतने पर भी उन्होंने बधाई दी। समारोह में विशिष्ट सेवा के लिए सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक नारायण सिंह नपलच्याल और मुख्य अग्निशमन अधिकारी वंश बहादुर यादव को राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया। वहीं, सराहनीय सेवा के लिए पुलिस अधीक्षक जगदीश चन्द्र, सहायक सेनानायक प्रतिमा भट्ट और सेवानिवृत्त उप निरीक्षक अभिसूचना सौहकार पुंडीर को पदक प्रदान किए गए। इस दौरान उत्तराखंड पुलिस के विशेष डाक आवरण और पुलिस पत्रिका का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राष्ट्रपति पुलिस निशान को उत्तराखंड पुलिस के साहस, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और जनसेवा की राष्ट्रीय मान्यता बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि केवल पुलिस विभाग की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। राज्य गठन के समय पुलिस बल में लगभग 13 हजार जवान, 96 थाने और 42 चौकियां थीं। आज 26 हजार से अधिक पुलिसकर्मी प्रदेश की सुरक्षा में तैनात हैं। उन्होंने देश की पहली महिला पुलिस महानिदेशक स्वर्गीय कंचन चौधरी भट्टाचार्य के उत्तराखंड पुलिस का नेतृत्व करने को भी प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया। वर्तमान में पुलिस बल में महिलाओं की भागीदारी लगभग 14 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ड्रग्स फ्री देवभूमि अभियान के तहत पिछले चार वर्षों में सात हजार से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और 307 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के अवैध मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। ऑपरेशन स्माइल के माध्यम से गुमशुदा बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने तथा ऑपरेशन मुक्ति के तहत भिक्षावृत्ति में लगे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए स्टेट साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। नरेंद्रनगर स्थित पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण और संसाधनों से पुलिस बल को और सक्षम बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति पुलिस निशान उत्तराखंड पुलिस की 25 वर्षों की यात्रा, शहादत, सेवा और समर्पण का राष्ट्रीय सम्मान है। यह उपलब्धि आने वाले समय में पुलिस बल के सामने जनता की सुरक्षा, पारदर्शी जांच और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी को भी और महत्वपूर्ण बनाती है।