Jun 19, 2026

अस्पताल में शराब बरामदगी के बाद फिर कसौटी पर बिहार का शराबबंदी कानून

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मुजफ्फरपुर। बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून लागू होने के बावजूद शराब तस्करी और सेवन के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ताजा मामला उत्तर बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (SKMCH) से सामने आया है, जहां इलाज के लिए भर्ती मरीज के बेड तक शराब पहुंचने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पुलिस ने अस्पताल के हड्डी रोग वार्ड से कोल्ड ड्रिंक की बोतलों में छिपाकर लाई गई देसी शराब बरामद की है। मामले में मरीज के पिता और भाई को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि शराबबंदी कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर भी नई बहस छेड़ दी है। जिस अस्पताल में मरीजों को स्वास्थ्य लाभ मिलना चाहिए, वहां खुलेआम शराब पहुंचने और सेवन किए जाने की खबर ने लोगों को हैरान कर दिया है। जानकारी के अनुसार वैशाली जिले के बेलसर थाना क्षेत्र निवासी बबलू शर्मा हड्डी रोग विभाग में भर्ती हैं। आरोप है कि उनके परिजन कई दिनों से अस्पताल के अंदर चोरी-छिपे शराब लेकर आ रहे थे। शराब को छिपाने के लिए पानी और सॉफ्ट ड्रिंक की बोतलों का इस्तेमाल किया जा रहा था ताकि किसी को शक न हो। अस्पताल के वार्ड में बैठकर शराब का सेवन भी किया जा रहा था। मामले का खुलासा तब हुआ जब वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों और उनके परिजनों ने लगातार शराब की दुर्गंध महसूस की। शुरुआत में लोगों को लगा कि कहीं बाहर से गंध आ रही होगी, लेकिन जब कई दिनों तक यह स्थिति बनी रही तो मरीजों और उनके परिजनों को शक हुआ। आरोप है कि शराब पीने वाले लोग वार्ड में हंगामा भी करते थे, जिससे अन्य मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वार्ड में मौजूद महिलाओं और बुजुर्ग मरीजों को इस वजह से काफी असुविधा हो रही थी। कई बार समझाने के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद कुछ जागरूक मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन को इसकी सूचना दी। शिकायत मिलने के बाद वार्ड में हंगामा शुरू हो गया और मामला तेजी से फैल गया। बताया जा रहा है कि जब ऑर्थो वार्ड संख्या-2 के आसपास शराब जैसी तीखी दुर्गंध फैली तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया। इसी दौरान कुछ संदिग्ध लोग वार्ड से बाहर निकलने का प्रयास करने लगे। इससे लोगों का शक और गहरा गया। वार्ड में भर्ती एक मरीज ने पूरे मामले की जानकारी अस्पताल प्रशासन और पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। तलाशी के दौरान एक झोले से कोल्ड ड्रिंक की बोतल में भरी हुई देसी शराब बरामद हुई। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए मरीज के पिता और भाई को हिरासत में ले लिया। पूछताछ के बाद मामले में अहियापुर थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और आगे की जांच जारी है। जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन प्लांट और अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर बड़ी संख्या में शराब की खाली बोतलें मिलीं। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि अस्पताल परिसर में लंबे समय से शराब सेवन का यह खेल चल रहा था और किसी स्तर पर निगरानी में गंभीर चूक हुई है। मरीज की एक परिजन किरण कुमारी ने बताया कि आरोपी शराब पीकर वार्ड में शोर-शराबा और हंगामा कर रहे थे। इससे मरीजों को काफी परेशानी हो रही थी। जब स्थिति असहनीय हो गई तो इसकी शिकायत की गई, जिसके बाद पुलिस कार्रवाई हुई। घटना सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन भी हरकत में आ गया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. महेश प्रसाद ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि अस्पताल इलाज का स्थान है, यहां इस प्रकार की गतिविधियों को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो भी लोग इस मामले में शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधीक्षक ने यह भी कहा कि यदि वार्ड में लंबे समय से इस तरह की गतिविधियां चल रही थीं तो वार्ड प्रभारी की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कर्मचारियों को इसकी जानकारी थी तो विभाग को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई। मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने बिहार में लागू शराबबंदी कानून की प्रभावशीलता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस राज्य में शराब रखने, बेचने और सेवन करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है, वहां सरकारी अस्पताल के वार्ड तक शराब पहुंच जाना प्रशासनिक व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है। अब सभी की नजर पुलिस जांच और अस्पताल प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई है कि इस पूरे नेटवर्क का खुलासा कैसे होता है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर शराब पहुंचने की यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्था, सुरक्षा व्यवस्था और शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन से जुड़े कई गंभीर सवाल छोड़ गई है, जिनके जवाब तलाशना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।