Jun 19, 2026

गदरपुर मामला ऑनलाइन कट्टरपंथ पर खड़े कर रहा सवाल

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गदरपुर। उत्तराखंड एसटीएफ की कार्रवाई में गिरफ्तार किए गए गदरपुर निवासी संदिग्ध कट्टरपंथी मोहम्मद सलाउद्दीन को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी खुद को एक संभावित फिदायीन हमले के लिए तैयार कर रहा था और अपनी शारीरिक तैयारियों से जुड़े वीडियो देश और विदेश में बैठे कथित हैंडलरों को भेज रहा था। एसटीएफ की जांच के अनुसार सलाउद्दीन नियमित रूप से दौड़ लगाने, पुशअप्स करने और अन्य शारीरिक गतिविधियों के वीडियो रिकॉर्ड करता था। इन वीडियो को वह एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम और सिग्नल के माध्यम से अपने संपर्कों तक पहुंचाता था। चैट रिकॉर्ड्स में वह खुद को किसी भी ‘टास्क’ के लिए तैयार और सक्षम बताता हुआ पाया गया है। सुरक्षा एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसे कौन निर्देश दे रहा था और उसके संपर्क किन-किन राज्यों या देशों तक फैले हुए थे।

सोशल मीडिया के जरिए बढ़ा कट्टरपंथ की ओर झुकाव
पूछताछ में सामने आया है कि विभिन्न स्थानों पर धार्मिक स्थलों को लेकर हुई घटनाओं से वह प्रभावित और आक्रोशित था। इसी दौरान सोशल मीडिया के माध्यम से कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने उससे संपर्क साधा और धीरे-धीरे उसे अपने प्रभाव में ले लिया। जांच एजेंसियों के अनुसार समय के साथ वह कई ऐसे ऑनलाइन समूहों से जुड़ गया, जहां उग्र और राष्ट्रविरोधी विचारधारा से जुड़ी सामग्री साझा की जाती थी। एसटीएफ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह के अनुसार आरोपी केवल स्वयं ही इस विचारधारा से प्रभावित नहीं था, बल्कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से अन्य युवाओं को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रहा था। उसके मोबाइल फोन से प्राप्त सामग्री में जिहाद, शहादत और उग्रवादी सोच से संबंधित बड़ी मात्रा में डिजिटल सामग्री मिली है, जिसकी विस्तृत जांच की जा रही है।

धमाके की साजिश के संकेत, तेलंगाना कनेक्शन भी आया सामने
जांच के दौरान सुरक्षा एजेंसियों को एक और महत्वपूर्ण जानकारी मिली है। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि आरोपी किसी बड़े विस्फोटक षड्यंत्र का हिस्सा हो सकता था। जांच में सामने आया है कि तेलंगाना निवासी जुबेर नामक व्यक्ति ने उसे चार डेटोनेटर उपलब्ध कराए थे। इसके अलावा आर्थिक सहायता मिलने की बात भी जांच एजेंसियों के संज्ञान में आई है। हालांकि अभी तक संभावित लक्ष्य या प्रस्तावित हमले की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन जांच अधिकारियों का मानना है कि समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। डेटोनेटर की सप्लाई, आर्थिक मदद और ऑनलाइन संपर्कों की कड़ियों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा रही है।

रामपुर के युवक को भी प्रभावित करने की कोशिश
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी उत्तर प्रदेश के रामपुर निवासी अताउल्ला समीर नामक युवक के संपर्क में था। एसटीएफ के अनुसार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए उसे भी कट्टरपंथी विचारधारा की ओर प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा था। मोहम्मद सलाउद्दीन के मोबाइल फोन की तकनीकी जांच के दौरान इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और सिग्नल पर कई संदिग्ध चैट और समूहों की जानकारी मिली। इसके बाद एसटीएफ की टीम रामपुर पहुंची और समीर को पूछताछ के लिए देहरादून लाया गया। यहां विभिन्न सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने उससे विस्तृत पूछताछ की। प्रारंभिक जांच में संकेत मिले कि उसे भी देशविरोधी विचारों और उग्रवादी सोच से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि विस्तृत पूछताछ और तकनीकी विश्लेषण के बाद उसे परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। उसका मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

डिजिटल फॉरेंसिक जांच पर टिकी आगे की कार्रवाई
एसटीएफ का कहना है कि मामले में बरामद मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियां और अन्य डिजिटल साक्ष्य जांच का प्रमुख आधार हैं। फॉरेंसिक विशेषज्ञ इन उपकरणों की गहन जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपी किन लोगों के संपर्क में था, उसे निर्देश कहां से मिल रहे थे और उसका नेटवर्क कितना व्यापक था। एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ और उग्रवादी विचारधारा की ओर धकेलने वाले तत्वों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। राज्य और केंद्रीय एजेंसियां मिलकर ऐसे नेटवर्क की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।