Jul 27, 2026

16 माओवादियों के आत्मसमर्पण से झारखंड में नक्सल विरोधी रणनीति को मिली अभूतपूर्व बढ़त

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रांची। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहे 16 माओवादियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में कई बड़े और इनामी नक्सली शामिल हैं। पुलिस ने इसे राज्य में नक्सल नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया है। पूरे मामले की विस्तृत जानकारी 28 जुलाई को आयोजित होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा की जाएगी।

पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वालों में एक रीजनल कमेटी सदस्य (आरसीएम), तीन जोनल कमेटी सदस्य, तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य, छह एरिया कमेटी सदस्य और तीन कैडर शामिल हैं। इनमें लाखों रुपये के इनामी माओवादी भी हैं, जो लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की सूची में शामिल थे। आत्मसमर्पण करने वालों में सबसे प्रमुख नाम 15 लाख रुपये के इनामी संतोष उर्फ बासुदेव दा उर्फ गांधी का है, जो रीजनल कमेटी सदस्य के रूप में सक्रिय था। इसके अलावा 10 लाख रुपये के इनामी चंदन लोहरा, 5-5 लाख रुपये के इनामी अनिल तुरी और सुखलाल बिरजिया, तथा 2 लाख रुपये के इनामी सुदेश होनहागा उर्फ सोनाराम उर्फ सोना ने भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इनके अलावा संतोष मांझी उर्फ जगबंधु, जयकांत मुंडा उर्फ गूंगा उर्फ बंगाली, राजनाथ हांसदा उर्फ गुना हांसदा, एतवारी मांझी उर्फ सोनोत उर्फ संत उर्फ शनिचरवा, देवान मुर्मू उर्फ शनिचर, सुमित्रा सुरीन, चंपा मांझियाइन उर्फ गुड़िया, सालेमी मुंडा उर्फ पारुल, मुन्नी सुरीन उर्फ मुरीन सुरीन और सीता मुंडा ने भी आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण के दौरान माओवादियों ने बड़ी मात्रा में आधुनिक हथियार और गोला-बारूद भी सुरक्षा बलों को सौंपे। इनमें 6 इंसास राइफल, 2 एके-47, 1 एचके-33 राइफल, 1 यूएस कार्बाइन और 1 एम-16 राइफल शामिल हैं। इसके साथ ही 38 मैगजीन और 1,562 जीवित कारतूस भी जमा कराए गए। पुलिस का मानना है कि हथियारों का यह जखीरा नक्सली संगठन की घटती ताकत और सुरक्षा बलों के लगातार दबाव का संकेत है। इधर, छत्तीसगढ़ में भी झारखंड से जुड़े आठ माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें जोनल कमेटी सदस्य अश्विन उर्फ लच्छू कोरसा सहित कई एरिया कमेटी सदस्य और अन्य सक्रिय नक्सली शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार ये सभी झारखंड के नक्सल प्रभावित इलाकों में भी सक्रिय रहे थे। गौरतलब है कि इससे पहले 21 मई को झारखंड में 25 माओवादियों और जेजेएमपी के दो उग्रवादियों ने भी आत्मसमर्पण किया था। लगातार हो रहे इन सरेंडर को सुरक्षा एजेंसियां नक्सल विरोधी रणनीति की बड़ी सफलता मान रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि विकास योजनाओं, पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे संयुक्त अभियान के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ रहा है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। पुलिस की नजर अब एक-एक करोड़ रुपये के इनामी सेंट्रल कमेटी सदस्य मिसिर बेसरा और असीम मंडल पर टिकी हुई है। आशंका है कि दोनों अभी भी सारंडा के जंगलों में छिपे हुए हैं। सुरक्षा बल उनके खिलाफ अभियान लगातार जारी रखे हुए हैं। लगातार हो रहे आत्मसमर्पणों से यह संकेत मिल रहा है कि झारखंड में नक्सलवाद की पकड़ धीरे-धीरे कमजोर पड़ रही है और अधिक से अधिक उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।